The Vision of Śiva· 4.19 / 124

The Vision of Śiva4.19

4.19
व्यवहारस्य बाधा चेद्व्यवहारे यथेष्टता । क्वचित्सत्यसुवर्णस्य प्रत्यन्ते व्यवहारिता ॥१९॥
vyavahārasya bādhā cedvyavahāre yatheṣṭatā | kvacitsatyasuvarṇasya pratyante vyavahāritā
— व्यवहार की ; — बाधा ; — यदि ; — व्यवहार में ; — यथेष्टता (मनमानापन) ; — कहीं ; — सच्चे सोने का ; — दूरस्थ प्रान्त में ; — (व्यवहार न होना)

यदि बाधा व्यवहार की हो, तो व्यवहार में यथेष्टता (मनमानापन आ जाएगा); क्योंकि कहीं — किसी दूरस्थ प्रान्त में — सच्चे सोने का भी (व्यवहार न होने पर भी वह सोना ही रहता है)।