कूटकार्षापणादौ वा व्यवहारोऽपि दृश्यते ।
तावता व्यवहारो वा यदात्माह्लादमात्रकम् ॥२०॥
kūṭakārṣāpaṇādau vā vyavahāro'pi dṛśyate |
tāvatā vyavahāro vā yadātmāhlādamātrakam
और कूट (नकली) कार्षापण आदि में भी व्यवहार दीखता है; तो (इससे सिद्ध हुआ कि) व्यवहार (सत्यता का प्रमाण नहीं) — (असली कसौटी तो) जो आत्म-आह्लाद-मात्र है (वही है)।