तदान्ध्यं जन्यते केन तस्य कालान्तरस्थितेः ।
सर्वैः समत्वं बाधो वा संबन्धे जननं कथम् ॥१८॥
tadāndhyaṃ janyate kena tasya kālāntarasthiteḥ |
sarvaiḥ samatvaṃ bādho vā saṃbandhe jananaṃ katham
उसका अन्धत्व (अग्राहकता) किससे उत्पन्न होती है, क्योंकि वह तो भिन्न काल में स्थित है (बाधक ज्ञान से)? या तो सबके साथ समता (होगी), अथवा बाध (समझाओ); और (भिन्न-काल की वस्तुओं के) सम्बन्ध में जनन कैसे (हो)?