अकाले जननं किंचिद्बाध्यते वा जनिक्रिया ।
कृत्वा कार्यं क्रिया याता गतायां किं प्रबाध्यते ॥१६॥
akāle jananaṃ kiṃcidbādhyate vā janikriyā |
kṛtvā kāryaṃ kriyā yātā gatāyāṃ kiṃ prabādhyate
क्या अकाल में (अनुचित समय पर) कोई जनन (होता है), अथवा जनन-क्रिया ही बाधित होती है? क्रिया अपना कार्य करके बीत गई; बीती हुई (क्रिया) में क्या बाधित किया जाए?