The Vision of Śiva· 4.16 / 124

The Vision of Śiva4.16

4.16
अकाले जननं किंचिद्बाध्यते वा जनिक्रिया । कृत्वा कार्यं क्रिया याता गतायां किं प्रबाध्यते ॥१६॥
akāle jananaṃ kiṃcidbādhyate vā janikriyā | kṛtvā kāryaṃ kriyā yātā gatāyāṃ kiṃ prabādhyate
— अकाल में ; — जनन ; — कोई ; — बाधित होता है ; — अथवा ; — जनन-क्रिया ; — करके ; — कार्य ; — क्रिया ; — बीत गई ; — बीती हुई में ; — क्या ; — बाधित किया जाए

क्या अकाल में (अनुचित समय पर) कोई जनन (होता है), अथवा जनन-क्रिया ही बाधित होती है? क्रिया अपना कार्य करके बीत गई; बीती हुई (क्रिया) में क्या बाधित किया जाए?