The Vision of Śiva· 4.15 / 124

The Vision of Śiva4.15

4.15
मिथ्यात्वं क्रियते कस्य किं काले यत्र तद्भवेत् । काल एव स न भवेदिति चेन्नैव कुत्रचित् ॥१५॥
mithyātvaṃ kriyate kasya kiṃ kāle yatra tadbhavet | kāla eva sa na bhavediti cennaiva kutracit
— मिथ्यात्व ; — किया जाता है ; — किसका ; — किस ; — काल में ; — जहाँ ; — वह ; — हो ; — काल ही ; — वह ; — न हो ; — यदि ऐसा कहो ; — नहीं ही ; — कहीं

किसकी मिथ्यात्व किया जाता है, और किस काल में, जहाँ वह हो? यदि (कहो कि) 'वह काल ही न हो' (अतः मिथ्याकरण कभी नहीं होता) — (तो उत्तर) वह (मिथ्याकरण) कहीं भी नहीं होता।