The Vision of Śiva· 4.14 / 124

The Vision of Śiva4.14

4.14
नाभाष्य व्यवहारार्थमेवं वस्त्विति निश्चितम् । तथैवास्तु शिवावस्था केनासौ विनिवारिता ॥१४॥
nābhāṣya vyavahārārthamevaṃ vastviti niścitam | tathaivāstu śivāvasthā kenāsau vinivāritā
— नहीं ; — भासित करके ; — व्यवहार के प्रयोजन से ; — इस प्रकार ; — वस्तु ; — ऐसे ; — निश्चित ; — वैसी ही (स्वतः) हो ; — शिव-अवस्था ; — किससे ; — यह ; — निवारित

(कोई वस्तु) पहले व्यवहार के प्रयोजन से भासित करके 'इस प्रकार वस्तु (है)' — ऐसे निश्चित नहीं की जाती (अपितु वह स्वयं में सत् है); तो (उसमें) शिव-अवस्था वैसी ही (स्वतः) हो — यह किससे निवारित है?