नाभाष्य व्यवहारार्थमेवं वस्त्विति निश्चितम् ।
तथैवास्तु शिवावस्था केनासौ विनिवारिता ॥१४॥
nābhāṣya vyavahārārthamevaṃ vastviti niścitam |
tathaivāstu śivāvasthā kenāsau vinivāritā
(कोई वस्तु) पहले व्यवहार के प्रयोजन से भासित करके 'इस प्रकार वस्तु (है)' — ऐसे निश्चित नहीं की जाती (अपितु वह स्वयं में सत् है); तो (उसमें) शिव-अवस्था वैसी ही (स्वतः) हो — यह किससे निवारित है?