The Vision of Śiva· 4.114 / 124

The Vision of Śiva4.114

4.114
चैतन्येनाप्यमूर्तेन मिश्रतान्यस्य कीदृशी । किं स्वयं तत्प्रमेयत्वमस्य चेदतिरेकतः ॥११४॥
caitanyenāpyamūrtena miśratānyasya kīdṛśī | kiṃ svayaṃ tatprameyatvamasya cedatirekataḥ
— चैतन्य के साथ भी ; — भी ; — अमूर्त ; — मिश्रण ; — दूसरे (अर्थ) का ; — कैसा ; — क्या स्वयं ; — उसका प्रमेयत्व (ज्ञेयता) ; — इस (चैतन्य) का ; — यदि ; — अतिरिक्तता (पृथक्ता) से

अमूर्त चैतन्य के साथ भी दूसरे (अर्थ) का कैसा मिश्रण (हो सकता है)? क्या उसका (अर्थ का) प्रमेयत्व (ज्ञेयता) स्वयं (का है), अथवा इस (चैतन्य) का — यदि (इसे अर्थ की) अतिरिक्तता (पृथक्ता) से (मानो, तो कोई मिश्रण सम्भव ही नहीं)?