संस्करोति तदात्मानममूर्ते संस्कृतिः कथम् ।
तद्रूपमात्मन्येतद्येनाश्लेषो यदि चोच्यते ॥११३॥
saṃskaroti tadātmānamamūrte saṃskṛtiḥ katham |
tadrūpamātmanyetadyenāśleṣo yadi cocyate
(यदि कहो कि अर्थ) उस आत्मा को संस्कृत (संस्कारित) करता है — (तो) अमूर्त में संस्कृति (संस्कार) कैसे? और यदि कहा जाए कि वह (अर्थ का) रूप आत्मा में (आरोपित है), जिससे (दोनों का) आश्लेष (सम्पर्क) (होता है) — (तो यह भी निरंश आत्मा में असंगत है)।