The Vision of Śiva· 4.112 / 124

The Vision of Śiva4.112

4.112
मनसावेदितार्थस्य तद्देशित्वमथोच्यते । वर्णिते योगिता कस्य यदि वा तत्स्वरूपतः ॥११२॥
manasāveditārthasya taddeśitvamathocyate | varṇite yogitā kasya yadi vā tatsvarūpataḥ
— मन से ; — आवेदित (निवेदित) अर्थ की ; — उस (मानस) देश में स्थिति ; — फिर ; — कही जाती है ; — वर्णित (किए जाने) पर ; — योगिता ; — किसकी ; — अथवा यदि ; — उसके (अर्थ के) स्वरूप से

(यदि) फिर कहा जाए कि मन से आवेदित (निवेदित) अर्थ की उस (मानस) देश में स्थिति (हो जाती है) — (तो) वर्णित (किए जाने) पर किसकी (किसके साथ) योगिता? अथवा यदि (अर्थ के अपने) स्वरूप से (संयोग कहो, तो वही कठिनाई)।