प्रक्रियामात्रमेवैतद्यतः पूर्वापरात्मता ।
क्रियायाः कारकाणां हि क्रमोऽस्त्येव स्वकर्मणि ॥१०४॥
prakriyāmātramevaitadyataḥ pūrvāparātmatā |
kriyāyāḥ kārakāṇāṃ hi kramo'styeva svakarmaṇi
यह तो प्रक्रिया-मात्र (व्यापार-क्रम मात्र) है, क्योंकि पूर्व-अपर-स्वरूप क्रिया का है; क्योंकि कारकों का अपने व्यापार में क्रम है ही (किन्तु अधिष्ठाता एक रहता है)।