The Vision of Śiva· 3.59 / 99

The Vision of Śiva3.59

3.59
नैषा क्रिया भवति किं निरिच्छे किं क्रिया भवेत् । निर्ज्ञाने वा ततो ज्ञेयं नाशक्तिः काचन स्थितिः ॥५९॥
naiṣā kriyā bhavati kiṃ niricche kiṃ kriyā bhavet | nirjñāne vā tato jñeyaṃ nāśaktiḥ kācana sthitiḥ
— नहीं ; — यह ; — क्रिया ; — है ; — क्या ; — इच्छारहित में ; — कौन-सी ; — क्रिया ; — हो ; — ज्ञानरहित में ; — अथवा ; — इससे ; — ज्ञातव्य ; — नहीं ; — अशक्ति (शक्ति-रहितता) ; — कोई ; — स्थिति

— तो क्या यह क्रिया नहीं है? इच्छारहित में कौन-सी क्रिया हो? अथवा ज्ञानरहित में? इससे यह ज्ञातव्य है कि (शिव की) कोई भी स्थिति अशक्ति (शक्ति-रहित) नहीं।