The Vision of Śiva· 3.58 / 99

The Vision of Śiva3.58

3.58
निरिच्छा न च शक्येत वक्तुमेवं कदाचन । अस्ति स्थितोऽसावेतस्यामवस्थायां शिवो यदि ॥५८॥
niricchā na ca śakyeta vaktumevaṃ kadācana | asti sthito'sāvetasyāmavasthāyāṃ śivo yadi
— इच्छा-रहित ; — और नहीं ; — हो सके ; — कहना ; — इस प्रकार ; — कभी ; — है ; — स्थित ; — वह ; — इस ; — अवस्था में ; — शिव ; — यदि

और न ही (वह अवस्था) इच्छा-रहित है — ऐसा कभी नहीं कहा जा सकता; (क्योंकि) यदि शिव इस अवस्था में स्थित है ही —