निरिच्छा न च शक्येत वक्तुमेवं कदाचन ।
अस्ति स्थितोऽसावेतस्यामवस्थायां शिवो यदि ॥५८॥
niricchā na ca śakyeta vaktumevaṃ kadācana |
asti sthito'sāvetasyāmavasthāyāṃ śivo yadi
और न ही (वह अवस्था) इच्छा-रहित है — ऐसा कभी नहीं कहा जा सकता; (क्योंकि) यदि शिव इस अवस्था में स्थित है ही —