The Vision of Śiva· 3.43 / 99

The Vision of Śiva3.43

3.43
क्षीरवद्यदि वोच्येत पराधीनं जडं भवेत् । एतयैव दिशा शोध्यं शुद्धन्यूनादिदूषणम् ॥४३॥
kṣīravadyadi vocyeta parādhīnaṃ jaḍaṃ bhavet | etayaiva diśā śodhyaṃ śuddhanyūnādidūṣaṇam
— दूध के समान ; — यदि ; — अथवा ; — कहा जाए ; — पराधीन ; — जड़ ; — होगा ; — इसी ; — दिशा (तर्क) से ; — शोधित (परिहार) करने योग्य ; — शुद्धि, न्यूनता आदि का दूषण

और यदि कहा जाए कि 'दूध के समान (शिव भी) पराधीन और जड़ हो जाएगा' — तो इसी दिशा (तर्क) से शुद्धि, न्यूनता आदि के दूषण को भी शोधित (परिहृत) कर लेना चाहिए।