क्षीरवद्यदि वोच्येत पराधीनं जडं भवेत् ।
एतयैव दिशा शोध्यं शुद्धन्यूनादिदूषणम् ॥४३॥
kṣīravadyadi vocyeta parādhīnaṃ jaḍaṃ bhavet |
etayaiva diśā śodhyaṃ śuddhanyūnādidūṣaṇam
और यदि कहा जाए कि 'दूध के समान (शिव भी) पराधीन और जड़ हो जाएगा' — तो इसी दिशा (तर्क) से शुद्धि, न्यूनता आदि के दूषण को भी शोधित (परिहृत) कर लेना चाहिए।