The Vision of Śiva· 3.42 / 99

The Vision of Śiva3.42

3.42
स्वेच्छातो भावरूपत्वे पराधीना कुतः स्थितिः ॥४२॥
svecchāto bhāvarūpatve parādhīnā kutaḥ sthitiḥ
— अपनी इच्छा से ; — भाव-रूप होने पर ; — पराधीन ; — कहाँ से ; — स्थिति

जब (शिव) अपनी ही इच्छा से भाव-रूप होता है, तो (उसकी) स्थिति पराधीन कहाँ से (हो सकती है)?