The Vision of Śiva· 3.41 / 99

The Vision of Śiva3.41

3.41
न तथा जडता क्वापि तथाग्रे सुविचारितैः । वर्णयिष्याम एवात्र न च सावयवः क्वचित् ॥४१॥
na tathā jaḍatā kvāpi tathāgre suvicāritaiḥ | varṇayiṣyāma evātra na ca sāvayavaḥ kvacit
— नहीं ; — वैसी ; — जड़ता ; — कहीं भी ; — वैसा ; — आगे ; — सुविचारित (युक्तियों) से ; — वर्णित करेंगे ही ; — यहाँ ; — और नहीं ; — सावयव ; — कहीं

— (तो वस्तुतः) वैसी जड़ता कहीं नहीं है; इसे हम आगे सुविचारित (युक्तियों) से वर्णित करेंगे ही; और (शिव) कहीं भी सावयव नहीं है।