अत एव परेच्छातो न जडत्वमवस्थितम् ।
पृथिव्यादितत्त्वगणे जडत्वं चेत्प्रतीयते ॥४०॥
ata eva parecchāto na jaḍatvamavasthitam |
pṛthivyāditattvagaṇe jaḍatvaṃ cetpratīyate
इसी कारण परम (शिव) की इच्छा से कोई (वास्तविक) जड़त्व अवस्थित नहीं है; और यदि पृथ्वी आदि तत्त्व-समूह में जड़त्व प्रतीत भी होता है —