The Vision of Śiva· 3.34 / 99

The Vision of Śiva3.34

3.34
क्षीरमायाप्रकृतिवद्यावतश्चैव यावती । शिवस्य तादृगात्ममुत्पद्येतात्र योगिवत् ॥३४॥
kṣīramāyāprakṛtivadyāvataścaiva yāvatī | śivasya tādṛgātmamutpadyetātra yogivat
— दूध, माया या प्रकृति के समान ; — जितने का ; — निश्चय ही ; — जितनी (मात्रा में) ; — शिव का ; — वैसा ; — आत्मा (रूप) ; — उत्पन्न होगा ; — यहाँ ; — योगी के समान

(उत्तर, हमारा पक्ष:) जैसे दूध, माया या प्रकृति (विकार को प्राप्त होती है) — जितनी और जैसी (मात्रा में), वैसा ही शिव का आत्मा (रूप) यहाँ उत्पन्न होगा — योगी के समान।