तदात्मनो हि स्थूलस्य सूक्ष्मस्याथ विकारिता ॥३३॥
tadātmano hi sthūlasya sūkṣmasyātha vikāritā
(आक्षेप:) क्योंकि जिसका आत्मा वह (विश्व) है, उस स्थूल या सूक्ष्म (शिव) की विकारिता (आ जाएगी)।
(आक्षेप:) क्योंकि जिसका आत्मा वह (विश्व) है, उस स्थूल या सूक्ष्म (शिव) की विकारिता (आ जाएगी)।