The Vision of Śiva· 3.33 / 99

The Vision of Śiva3.33

3.33
तदात्मनो हि स्थूलस्य सूक्ष्मस्याथ विकारिता ॥३३॥
tadātmano hi sthūlasya sūkṣmasyātha vikāritā
— जिसका आत्मा वह (विश्व) है उसका ; — क्योंकि ; — स्थूल का ; — सूक्ष्म का ; — और ; — विकारिता

(आक्षेप:) क्योंकि जिसका आत्मा वह (विश्व) है, उस स्थूल या सूक्ष्म (शिव) की विकारिता (आ जाएगी)।