विश्वस्यासत्यरूपत्वं यैर्वाक्यैर्वर्णितं क्वचित् ।
शिवोक्तैस्तैर्विरोधः स्यात्सर्वसत्यत्ववादिनः ॥३२॥
viśvasyāsatyarūpatvaṃ yairvākyairvarṇitaṃ kvacit |
śivoktaistairvirodhaḥ syātsarvasatyatvavādinaḥ
(आक्षेप:) जिन वाक्यों से कहीं विश्व का असत्य-रूपत्व वर्णित है, वे शिव-कथित (वाक्य) हैं; उनके साथ सर्व-सत्यत्व-वादी (तुम्हारा) विरोध होगा।