The Vision of Śiva· 3.32 / 99

The Vision of Śiva3.32

3.32
विश्वस्यासत्यरूपत्वं यैर्वाक्यैर्वर्णितं क्वचित् । शिवोक्तैस्तैर्विरोधः स्यात्सर्वसत्यत्ववादिनः ॥३२॥
viśvasyāsatyarūpatvaṃ yairvākyairvarṇitaṃ kvacit | śivoktaistairvirodhaḥ syātsarvasatyatvavādinaḥ
— विश्व का ; — असत्य-रूपत्व ; — जिन ; — वाक्यों से ; — वर्णित ; — कहीं ; — शिव-कथित ; — उनके साथ ; — विरोध ; — होगा ; — सर्व-सत्यत्व-वादी का

(आक्षेप:) जिन वाक्यों से कहीं विश्व का असत्य-रूपत्व वर्णित है, वे शिव-कथित (वाक्य) हैं; उनके साथ सर्व-सत्यत्व-वादी (तुम्हारा) विरोध होगा।