The Vision of Śiva· 3.31 / 99

The Vision of Śiva3.31

3.31
इच्छावत्कार्यनिष्पत्त्या पुनरिच्छान्तरोद्गमे । शिवस्य हेतुर्वक्तव्यो यदर्थं सा नवोद्गता ॥३१॥
icchāvatkāryaniṣpattyā punaricchāntarodgame | śivasya heturvaktavyo yadarthaṃ sā navodgatā
— इच्छावान् होने से ; — कार्य की निष्पत्ति से ; — पुनः ; — दूसरी इच्छा के उद्गम में ; — शिव का ; — हेतु ; — बतलाना पड़ेगा ; — जिस प्रयोजन से ; — वह (इच्छा) ; — नई उठी

(आक्षेप:) इच्छावान् होने से एक कार्य की निष्पत्ति के बाद पुनः दूसरी इच्छा के उद्गम में शिव का हेतु बतलाना पड़ेगा — कि वह नई (इच्छा) किस प्रयोजन से उठी।