The Vision of Śiva· 3.30 / 99

The Vision of Śiva3.30

3.30
पृथिव्यादिकल्पनया कल्पनावान् शिवो भवेत् । शिवतत्त्वे सानुभवे पश्यन्तीतुल्यता तदा ॥३०॥
pṛthivyādikalpanayā kalpanāvān śivo bhavet | śivatattve sānubhave paśyantītulyatā tadā
— पृथ्वी आदि की कल्पना से ; — कल्पनावान् (मिथ्या-कल्पना का विषय) ; — शिव ; — होगा ; — शिव-तत्त्व के ; — अनुभव-सहित होने पर ; — पश्यन्ती के साथ तुल्यता ; — तब

(आक्षेप:) पृथ्वी आदि की कल्पना से शिव कल्पनावान् (मिथ्या-कल्पना का विषय) हो जाएगा; और तब शिव-तत्त्व के अनुभव-सहित होने पर पश्यन्ती के साथ तुल्यता (आ जाएगी)।