पृथिव्यादिकल्पनया कल्पनावान् शिवो भवेत् ।
शिवतत्त्वे सानुभवे पश्यन्तीतुल्यता तदा ॥३०॥
pṛthivyādikalpanayā kalpanāvān śivo bhavet |
śivatattve sānubhave paśyantītulyatā tadā
(आक्षेप:) पृथ्वी आदि की कल्पना से शिव कल्पनावान् (मिथ्या-कल्पना का विषय) हो जाएगा; और तब शिव-तत्त्व के अनुभव-सहित होने पर पश्यन्ती के साथ तुल्यता (आ जाएगी)।