ततश्च शिवधर्मादेर्वेदादेरकृतार्थता ।
निमित्तसमवाययादिकारणेषु समानता ॥२९॥
tataśca śivadharmādervedāderakṛtārthatā |
nimittasamavāyayādikāraṇeṣu samānatā
(आक्षेप:) और उससे शिवधर्म आदि तथा वेद आदि की अकृतार्थता (व्यर्थता हो जाती है); और निमित्त, समवायी आदि कारणों में समानता (भेद का लोप हो जाता है)।