The Vision of Śiva· 3.28 / 99

The Vision of Śiva3.28

3.28
सर्वेषामेव मुक्तत्वे स्थिते कस्योपदेश्यता । धर्माधर्मौ नसं बद्धौ शिवस्य न तयोः कृतिः ॥२८॥
sarveṣāmeva muktatve sthite kasyopadeśyatā | dharmādharmau nasaṃ baddhau śivasya na tayoḥ kṛtiḥ
— सभी की ही ; — मुक्तत्व होने पर ; — स्थित होने पर ; — किसकी ; — उपदेश्यता ; — धर्म और अधर्म ; — नहीं ; — सम्बद्ध ; — शिव की ; — नहीं ; — उन दोनों का ; — करना

(आक्षेप:) यदि सभी मुक्त ही हैं, तो किसकी उपदेश्यता (उपदेश-योग्यता)? धर्म और अधर्म (शिव से) सम्बद्ध नहीं, और न शिव द्वारा उनका करना (सम्भव है)।