The Vision of Śiva· 3.27 / 99

The Vision of Śiva3.27

3.27
तदभावाद्देवगुरुशास्त्रोच्छेदो भवेत्तराम् । निरर्थकत्वं शास्त्रस्य करणे तन्निरूपणे ॥२७॥
tadabhāvāddevaguruśāstrocchedo bhavettarām | nirarthakatvaṃ śāstrasya karaṇe tannirūpaṇe
— उनके अभाव से ; — देव-गुरु-शास्त्र का उच्छेद ; — होगा ; — और भी अधिक ; — निरर्थकता ; — शास्त्र की ; — रचने में ; — उसके निरूपण (व्याख्या) में

(आक्षेप:) और उनके (बन्ध-मोक्ष के) अभाव से देव, गुरु और शास्त्र का उच्छेद और भी अधिक हो जाएगा — (तथा) शास्त्र की निरर्थकता, उसके रचने में और उसके निरूपण (व्याख्या) में।