तदभावाद्देवगुरुशास्त्रोच्छेदो भवेत्तराम् ।
निरर्थकत्वं शास्त्रस्य करणे तन्निरूपणे ॥२७॥
tadabhāvāddevaguruśāstrocchedo bhavettarām |
nirarthakatvaṃ śāstrasya karaṇe tannirūpaṇe
(आक्षेप:) और उनके (बन्ध-मोक्ष के) अभाव से देव, गुरु और शास्त्र का उच्छेद और भी अधिक हो जाएगा — (तथा) शास्त्र की निरर्थकता, उसके रचने में और उसके निरूपण (व्याख्या) में।