The Vision of Śiva· 3.25 / 99

The Vision of Śiva3.25

3.25
एवं सति समग्रस्य व्यवहारस्य भङ्गिता । तथैवं संप्रवृत्तौ तु निमित्तकलनापतेत् ॥२५॥
evaṃ sati samagrasya vyavahārasya bhaṅgitā | tathaivaṃ saṃpravṛttau tu nimittakalanāpatet
— ऐसा होने पर ; — समग्र ; — व्यवहार का ; — भंगिता (भंग) ; — इसी प्रकार ; — थूस ; — (सृष्टि के) सम्यक् प्रवर्तन में ; — किन्तु ; — निमित्त (कारण) की कल्पना ; — आ पड़ेगी

(आक्षेप:) ऐसा होने पर समग्र व्यवहार का भंग हो जाता है; और इसी प्रकार (सृष्टि के) सम्यक् प्रवर्तन में निमित्त (कारण) की कल्पना (असंगत रूप से) आ पड़ेगी।