The Vision of Śiva· 3.24 / 99

The Vision of Śiva3.24

3.24
यत्रोपरि न हस्तादि नेयमीश्वरसंनिधौ । तत्र पादविहारादेः स्फुटमेव निषिद्धता ॥२४॥
yatropari na hastādi neyamīśvarasaṃnidhau | tatra pādavihārādeḥ sphuṭameva niṣiddhatā
— जहाँ ; — ऊपर ; — नहीं ; — हाथ आदि ; — नहीं ; — यह (अनौचित्य) ; — ईश्वर के समीप में ; — वहाँ ; — पैरों से विचरण आदि का ; — स्पष्टतः ही ; — निषिद्धता

(आक्षेप:) जहाँ ऊपर हाथ आदि नहीं (उठाना चाहिए), यह (अनौचित्य) ईश्वर के समीप में (होता है); वहाँ पैरों से विचरण आदि का स्पष्टतः ही निषेध है (— किन्तु यदि सब शिव हैं, तो ऐसे नियम निरर्थक हो जाते हैं)।