The Vision of Śiva· 2.81 / 90

The Vision of Śiva2.81

2.81
शब्दस्य विषयाख्यस्य मिश्रत्वेनेन्द्रियस्य तु । सर्वदर्शनविज्ञानशून्यता पदवेदिनाम् ॥८१॥
śabdasya viṣayākhyasya miśratvenendriyasya tu | sarvadarśanavijñānaśūnyatā padavedinām
— शब्द का ; — विषय कहलाने वाले का ; — मिश्रित होने से ; — इन्द्रिय के साथ ; — निश्चय ही ; — समस्त दर्शन-विज्ञान की शून्यता ; — (मात्र) पद-वेत्ताओं की

क्योंकि विषय कहलाने वाला शब्द इन्द्रिय के साथ मिश्रित है, अतः (मात्र) पद-वेत्ता (शब्द-ज्ञानी) समस्त दर्शन और विज्ञान से शून्य हैं।