शब्दस्य विषयाख्यस्य मिश्रत्वेनेन्द्रियस्य तु ।
सर्वदर्शनविज्ञानशून्यता पदवेदिनाम् ॥८१॥
śabdasya viṣayākhyasya miśratvenendriyasya tu |
sarvadarśanavijñānaśūnyatā padavedinām
क्योंकि विषय कहलाने वाला शब्द इन्द्रिय के साथ मिश्रित है, अतः (मात्र) पद-वेत्ता (शब्द-ज्ञानी) समस्त दर्शन और विज्ञान से शून्य हैं।