The Vision of Śiva· 2.80 / 90

The Vision of Śiva2.80

2.80
अथ नाम्नैव पश्यन्ती स्फुटमेव जडा ततः । ज्ञानशक्तिः स्मृता भङ्ग्या स्त्रीलिङ्गव्यपदेशतः ॥८०॥
atha nāmnaiva paśyantī sphuṭameva jaḍā tataḥ | jñānaśaktiḥ smṛtā bhaṅgyā strīliṅgavyapadeśataḥ
— और (फिर) ; — नाम से ही ; — पश्यन्ती ; — स्पष्टतः ही ; — जड़ ; — इसलिए ; — ज्ञानशक्ति ; — कही गई ; — भंगिमा (वाक्-शैली) से ; — स्त्रीलिंग व्यपदेश के कारण

और 'पश्यन्ती' अपने नाम से ही स्पष्टतः जड़ है; उसे 'ज्ञानशक्ति' तो (केवल) एक भंगिमा (वाक्-शैली) से, स्त्रीलिंग व्यपदेश के कारण, कहा गया है।