The Vision of Śiva· 2.35 / 90

The Vision of Śiva2.35

2.35
सत्यैव यदि विद्यानामभावस्तर्हि शून्यता । शून्यया बाध्यते चित्रं पश्यन्ती दर्शनात्मिका ॥३५॥
satyaiva yadi vidyānāmabhāvastarhi śūnyatā | śūnyayā bādhyate citraṃ paśyantī darśanātmikā
— सत्य ही (हो) तो ; — यदि ; — विद्या ; — निश्चय ही ; — अभाव ; — तब ; — शून्यता ; — शून्य से ; — बाधित होती है ; — आश्चर्य! ; — पश्यन्ती ; — दर्शन-स्वरूपा

यदि विद्या सत्य ही है, फिर भी (तुम उसे) अभाव (बना देते हो), तो वह शून्यता हो जाएगी; और — कैसा आश्चर्य! — दर्शन-स्वरूपा पश्यन्ती उस शून्य से बाधित हो जाएगी।