The Vision of Śiva· 2.29 / 90

The Vision of Śiva2.29

2.29
स्वधर्मत्वेऽस्या मालिन्यं परधर्मेऽपि कस्य सा । परस्य शास्त्रानिष्टस्य स्वतन्त्रा वा तथापि सा ॥२९॥
svadharmatve'syā mālinyaṃ paradharme'pi kasya sā | parasya śāstrāniṣṭasya svatantrā vā tathāpi sā
— स्वधर्म होने पर ; — इसमें ; — मालिन्य ; — परधर्म होने पर ; — भी ; — किसकी ; — वह ; — 'पर' की ; — शास्त्र को अनिष्ट ; — स्वतन्त्र ; — अथवा ; — तब भी ; — वह

स्वधर्म होने पर तो उसमें मालिन्य (आता है); और परधर्म होने पर भी वह किसकी? क्योंकि ऐसा 'पर' तो (तुम्हारे) शास्त्र को अनिष्ट है; अथवा वह स्वतन्त्र (होगी) — किन्तु तब भी वह (असंगत ही रहती है)।