The Vision of Śiva· 2.30 / 90

The Vision of Śiva2.30

2.30
तत्वान्यत्वैरवाच्या वा यद्यविद्याभिधीयते ॥३०॥
tatvānyatvairavācyā vā yadyavidyābhidhīyate
— तत्त्व (एकत्व) और अन्यत्व (भेद) से ; — अवाच्य (अनिर्वचनीय) ; — अथवा ; — यदि ; — अविद्या ; — कही जाए

अथवा यदि वह अविद्या तत्त्व (एकत्व) और अन्यत्व (भेद) से अवाच्य (अनिर्वचनीय) कही जाए (— तो वही दोष यहाँ भी आते हैं)।