तत्वान्यत्वैरवाच्या वा यद्यविद्याभिधीयते ॥३०॥
tatvānyatvairavācyā vā yadyavidyābhidhīyate
अथवा यदि वह अविद्या तत्त्व (एकत्व) और अन्यत्व (भेद) से अवाच्य (अनिर्वचनीय) कही जाए (— तो वही दोष यहाँ भी आते हैं)।
अथवा यदि वह अविद्या तत्त्व (एकत्व) और अन्यत्व (भेद) से अवाच्य (अनिर्वचनीय) कही जाए (— तो वही दोष यहाँ भी आते हैं)।