The Vision of Śiva· 2.28 / 90

The Vision of Śiva2.28

2.28
अविद्यास्याः स्वधर्मः किं परधर्मोऽथवा भवेत् ॥२८॥
avidyāsyāḥ svadharmaḥ kiṃ paradharmo'thavā bhavet
— अविद्या ; — इसकी (पश्यन्ती की) ; — स्वधर्म ; — क्या ; — परधर्म ; — अथवा ; — होगी

यह अविद्या (पश्यन्ती का) स्वधर्म है, अथवा परधर्म होगी?