The Vision of Śiva· 2.27 / 90

The Vision of Śiva2.27

2.27
पश्यन्त्याः सत्यरूपायास्तत्सत्यत्वे न दर्शनम् । असत्ये सत्यदृष्ट्यैव पश्यन्त्यां मलिनात्मता ॥२७॥
paśyantyāḥ satyarūpāyāstatsatyatve na darśanam | asatye satyadṛṣṭyaiva paśyantyāṃ malinātmatā
— पश्यन्ती की ; — सत्य-रूप मानी गई ; — यदि वे (विषय) सत्य हैं ; — दर्शन नहीं ; — असत्य होने पर ; — सत्य-दृष्टि से ही ; — पश्यन्ती में ; — मलिन-स्वरूपता

सत्य-रूप मानी गई पश्यन्ती की: यदि वे (विषय) सत्य हैं, तो (नया) दर्शन नहीं; और यदि असत्य हैं, तो उन्हें सत्य रूप में देखने से ही पश्यन्ती में मलिनता आ जाती है।