पश्यन्त्याः सत्यरूपायास्तत्सत्यत्वे न दर्शनम् ।
असत्ये सत्यदृष्ट्यैव पश्यन्त्यां मलिनात्मता ॥२७॥
paśyantyāḥ satyarūpāyāstatsatyatve na darśanam |
asatye satyadṛṣṭyaiva paśyantyāṃ malinātmatā
सत्य-रूप मानी गई पश्यन्ती की: यदि वे (विषय) सत्य हैं, तो (नया) दर्शन नहीं; और यदि असत्य हैं, तो उन्हें सत्य रूप में देखने से ही पश्यन्ती में मलिनता आ जाती है।