The Vision of Śiva· 2.26 / 90

The Vision of Śiva2.26

2.26
तानि दृष्ट्वानुसृजति सृष्ट्वा वानुप्रपश्यति ॥२६॥
tāni dṛṣṭvānusṛjati sṛṣṭvā vānuprapaśyati
— उन्हें ; — देखकर ; — अनुसृजति (तदनन्तर सृजती है) ; — सृजकर ; — अथवा ; — अनुप्रपश्यति (तदनन्तर देखती है)

क्या वह उन्हें देखकर सृजती है, अथवा सृजकर देखती है? (दोनों ही प्रकार से क्रम असंगत है।)