The Vision of Śiva· 2.25 / 90

The Vision of Śiva2.25

2.25
ज्ञातान्सृजत्यसौ तान्वा नेति ज्ञातेष्वदर्शनम् ॥२५॥
jñātānsṛjatyasau tānvā neti jñāteṣvadarśanam
— ज्ञात (रूप में) ; — सृजती है ; — वह ; — उन्हें ; — अथवा ; — नहीं ; — ऐसा ; — ज्ञात वस्तुओं में ; — अदर्शन (न देखना)

क्या वह उन्हें ज्ञात रूप में सृजती है या नहीं? (यदि ज्ञात रूप में, तो) ज्ञात वस्तुओं में (पुनः नया) दर्शन नहीं (बनेगा)।