बहिर्भावान्विसृज्यादौ पश्चात्पश्यति साथ किम् ॥२४॥
bahirbhāvānvisṛjyādau paścātpaśyati sātha kim
क्या वह पहले बाह्य-भावों को विसर्जित (उत्पन्न) करके बाद में उन्हें देखती है? — अथवा क्या?
क्या वह पहले बाह्य-भावों को विसर्जित (उत्पन्न) करके बाद में उन्हें देखती है? — अथवा क्या?