The Vision of Śiva· 2.24 / 90

The Vision of Śiva2.24

2.24
बहिर्भावान्विसृज्यादौ पश्चात्पश्यति साथ किम् ॥२४॥
bahirbhāvānvisṛjyādau paścātpaśyati sātha kim
— बाह्य-भावों को ; — विसर्जित (उत्पन्न) करके ; — पहले ; — बाद में ; — देखती है ; — वह ; — अथवा क्या

क्या वह पहले बाह्य-भावों को विसर्जित (उत्पन्न) करके बाद में उन्हें देखती है? — अथवा क्या?