The Vision of Śiva· 1.8 / 49

The Vision of Śiva1.8

1.8
विचित्ररचनानानाकार्यसृष्टिप्रवर्तने । भवत्युन्मुखिता चित्ता सेच्छायाः प्रथमा तुटिः ॥८॥
vicitraracanānānākāryasṛṣṭipravartane | bhavatyunmukhitā cittā secchāyāḥ prathamā tuṭiḥ
— विचित्र रचना वाले नाना कार्यों की सृष्टि के प्रवर्तन में ; — उत्पन्न होती है ; — उन्मुखता, अभिमुखता ; — चित् की ; — वह ; — इच्छा की ; — प्रथम ; — तुटि (क्षण)

— विचित्र रचना वाले नाना कार्यों की सृष्टि के प्रवर्तन में चित् की उन्मुखता उत्पन्न होती है, वही इच्छा की प्रथम तुटि (क्षण) है।