विचित्ररचनानानाकार्यसृष्टिप्रवर्तने ।
भवत्युन्मुखिता चित्ता सेच्छायाः प्रथमा तुटिः ॥८॥
vicitraracanānānākāryasṛṣṭipravartane |
bhavatyunmukhitā cittā secchāyāḥ prathamā tuṭiḥ
— विचित्र रचना वाले नाना कार्यों की सृष्टि के प्रवर्तन में चित् की उन्मुखता उत्पन्न होती है, वही इच्छा की प्रथम तुटि (क्षण) है।