1.7 यदा तु तस्य चिद्धर्मविभवामोदजृम्भया ॥७॥ yadā tu tasya ciddharmavibhavāmodajṛmbhayā yadā — जब ; tu — किन्तु ; tasya — उसके ; ciddharmavibhavāmodajṛmbhayā — चिद्धर्म (चैतन्य) के वैभव के आमोद के उन्मेष (जृम्भा) से किन्तु जब उसके चिद्धर्म (चैतन्य) के वैभव के आमोद के उन्मेष (जृम्भा) से —