The Vision of Śiva· 1.7 / 49

The Vision of Śiva1.7

1.7
यदा तु तस्य चिद्धर्मविभवामोदजृम्भया ॥७॥
yadā tu tasya ciddharmavibhavāmodajṛmbhayā
— जब ; — किन्तु ; — उसके ; — चिद्धर्म (चैतन्य) के वैभव के आमोद के उन्मेष (जृम्भा) से

किन्तु जब उसके चिद्धर्म (चैतन्य) के वैभव के आमोद के उन्मेष (जृम्भा) से —