1.6 एवं न जातुचित्तस्य वियोगस्त्रितयात्मना ॥६॥ evaṃ na jātucittasya viyogastritayātmanā evam — इस प्रकार ; na — नहीं ; jātucit — कभी, किसी काल में ; tasya — उसका ; viyogaḥ — वियोग ; tritayātmanā — शक्ति-त्रय-स्वरूप से इस प्रकार उसका शक्ति-त्रय-स्वरूप से कभी भी, किसी काल में, वियोग नहीं होता।