एवं भेदात्मकं नित्यं शिवतत्त्वमनन्तकम् ।
तथा तस्य व्यवस्थानान्नानारूपेऽपि सत्यता ॥४९॥
evaṃ bhedātmakaṃ nityaṃ śivatattvamanantakam |
tathā tasya vyavasthānānnānārūpe'pi satyatā
इस प्रकार भेदात्मक होते हुए भी शिवतत्त्व नित्य और अनन्त है; और उसके (सर्वत्र) व्यवस्थान के कारण नाना-रूप (जगत्) में भी सत्यता है।