The Vision of Śiva· 1.48 / 49

The Vision of Śiva1.48

1.48
एवं सर्वपदार्थानां समैव शिवता स्थिता । परापरादिभेदोऽत्र श्रद्दधानैरुदाहृतः ॥४८॥
evaṃ sarvapadārthānāṃ samaiva śivatā sthitā | parāparādibhedo'tra śraddadhānairudāhṛtaḥ
— इस प्रकार ; — समस्त पदार्थों की ; — समान ; — ही ; — शिवता ; — स्थित ; — पर, अपर आदि का भेद ; — यहाँ ; — श्रद्धावान् (साधकों) के द्वारा ; — उदाहृत (उल्लिखित)

इस प्रकार समस्त पदार्थों की शिवता समान ही स्थित है; पर, अपर आदि का भेद यहाँ श्रद्धावान् (साधकों) के द्वारा (व्यवहार हेतु) उदाहृत किया गया है।