एवं सर्वपदार्थानां समैव शिवता स्थिता ।
परापरादिभेदोऽत्र श्रद्दधानैरुदाहृतः ॥४८॥
evaṃ sarvapadārthānāṃ samaiva śivatā sthitā |
parāparādibhedo'tra śraddadhānairudāhṛtaḥ
इस प्रकार समस्त पदार्थों की शिवता समान ही स्थित है; पर, अपर आदि का भेद यहाँ श्रद्धावान् (साधकों) के द्वारा (व्यवहार हेतु) उदाहृत किया गया है।