The Vision of Śiva2.1
अथास्माकं ज्ञानशक्तिर्या सदाशिवरूपता ।
वैयाकरणसाधूनां पश्यन्ती सा परा स्थितिः ॥१॥
athāsmākaṃ jñānaśaktiryā sadāśivarūpatā |
vaiyākaraṇasādhūnāṃ paśyantī sā parā sthitiḥ
— अब ; — हमारा, हमारे (मत में) ; — ज्ञानशक्ति ; — जो ; — सदाशिव-रूपता ; — श्रेष्ठ वैयाकरणों की (दृष्टि में) ; — पश्यन्ती (वाक् की 'देखने वाली' भूमि) ; — वह ; — परा (श्रेष्ठ) ; — स्थिति अब, जो हमारे (मत में) ज्ञानशक्ति अर्थात् सदाशिव-रूपता है, वही श्रेष्ठ वैयाकरणों के लिए वह परा स्थिति 'पश्यन्ती' है।