The Vision of Śiva· 2.2 / 90

The Vision of Śiva2.2

2.2
इत्याहुस्ते परं ब्रह्म यदनादि तथाक्षयम् । तदक्षरं शब्दरूपं सा पश्यन्ती परा हि वाक् ॥२॥
ityāhuste paraṃ brahma yadanādi tathākṣayam | tadakṣaraṃ śabdarūpaṃ sā paśyantī parā hi vāk
— इस प्रकार ; — कहते हैं ; — वे ; — परम ब्रह्म ; — जो ; — अनादि ; — तथा ; — अक्षय ; — वह ; — अक्षर (अविनाशी) ; — शब्द-रूप ; — वह ; — पश्यन्ती ; — परा ; — निश्चय ही ; — वाक्

इस प्रकार वे कहते हैं: यही परम ब्रह्म है, जो अनादि और अक्षय है — वह अक्षर शब्द-रूप है; वह पश्यन्ती ही परा वाक् है।