The Vision of Śiva· 2.3 / 90

The Vision of Śiva2.3

2.3
स एवात्मा सर्वदेहव्यापकत्वेन वर्तते । अन्तःपश्यदवस्थैव चिद्रूपत्वमरूपकम् ॥३॥
sa evātmā sarvadehavyāpakatvena vartate | antaḥpaśyadavasthaiva cidrūpatvamarūpakam
— वह ही ; — आत्मा ; — समस्त देहों में व्यापकता से ; — वर्तमान रहता है ; — अन्तःपश्यत् (भीतर देखने वाली) अवस्था ; — ही ; — चिद्रूपता ; — अरूप (रूप-रहित)

(वे कहते हैं:) वह (शब्द) ही आत्मा है, जो समस्त देहों में व्यापकता से वर्तमान है; वह अन्तःपश्यत् (भीतर देखने वाली) अवस्था ही है — चिद्रूप और अरूप।