The Vision of Śiva· 2.4 / 90

The Vision of Śiva2.4

2.4
अक्षादिवृत्तिभिर्हीनं देशकालादिशून्यकम् ॥४॥
akṣādivṛttibhirhīnaṃ deśakālādiśūnyakam
— इन्द्रिय आदि की वृत्तियों से ; — रहित ; — देश-काल आदि से शून्य

— इन्द्रिय आदि की वृत्तियों से रहित, तथा देश-काल आदि से शून्य।