The Vision of Śiva· 2.5 / 90

The Vision of Śiva2.5

2.5
सर्वतःक्रमसंहारमात्रमाकारवर्जितम् । ब्रह्मतत्त्वं परा काष्ठा परमार्थस्तदेव सः ॥५॥
sarvataḥkramasaṃhāramātramākāravarjitam | brahmatattvaṃ parā kāṣṭhā paramārthastadeva saḥ
— सब ओर से क्रम का संहार-मात्र ; — आकार से रहित ; — ब्रह्म-तत्त्व ; — परा काष्ठा (चरम सीमा) ; — परमार्थ ; — वही ; — वह

सब ओर से क्रम का संहार-मात्र, आकार से रहित — वही ब्रह्म-तत्त्व है, परा काष्ठा (चरम सीमा) है, परमार्थ है; वही वह (उनके मत में) है।