The Vision of Śiva· 2.6 / 90

The Vision of Śiva2.6

2.6
आस्ते विज्ञानरूपत्वे स शब्दोऽर्थविवक्षया । मध्यमा कथ्यते सैव बिन्दुनादमरुत्क्रमात् ॥६॥
āste vijñānarūpatve sa śabdo'rthavivakṣayā | madhyamā kathyate saiva bindunādamarutkramāt
— स्थित रहता है ; — विज्ञान-रूप अवस्था में ; — वह ; — शब्द ; — अर्थ कहने की इच्छा से ; — मध्यमा ; — कही जाती है ; — वही (शब्द) ; — बिन्दु-नाद-मरुत् के क्रम से

वह शब्द विज्ञान-रूप अवस्था में स्थित रहता है; अर्थ को कहने की इच्छा से, बिन्दु-नाद-मरुत् के क्रम से वही 'मध्यमा' कही जाती है।