The Vision of Śiva· 1.42 / 49

The Vision of Śiva1.42

1.42
तद्रूपत्वेन वा पश्यन्स्थितः शान्त इव क्वचित् । केवलेशदृधत्वेन क्वचित्केवलशंभुता ॥४२॥
tadrūpatvena vā paśyansthitaḥ śānta iva kvacit | kevaleśadṛdhatvena kvacitkevalaśaṃbhutā
— उस (शिव) रूप से ; — अथवा ; — देखता हुआ ; — स्थित ; — शान्त ; — मानो, सा ; — कहीं ; — केवल ईश के दृढ़त्व (एकमात्र प्रभु होने) से ; — कहीं ; — केवल शम्भुता (शम्भु-मात्र होने का भाव)

अथवा (सब को) अपने ही स्वरूप के रूप में देखता हुआ वह कहीं शान्त-सा स्थित रहता है; कहीं केवल ईश के दृढ़त्व (एकमात्र प्रभु होने) से, कहीं केवल शम्भुता (शम्भु-मात्र होने का भाव)।