तद्रूपत्वेन वा पश्यन्स्थितः शान्त इव क्वचित् ।
केवलेशदृधत्वेन क्वचित्केवलशंभुता ॥४२॥
tadrūpatvena vā paśyansthitaḥ śānta iva kvacit |
kevaleśadṛdhatvena kvacitkevalaśaṃbhutā
अथवा (सब को) अपने ही स्वरूप के रूप में देखता हुआ वह कहीं शान्त-सा स्थित रहता है; कहीं केवल ईश के दृढ़त्व (एकमात्र प्रभु होने) से, कहीं केवल शम्भुता (शम्भु-मात्र होने का भाव)।