The Vision of Śiva· 1.43 / 49

The Vision of Śiva1.43

1.43
अप्रबुद्धो निष्कलश्च क्वचित्प्रलयकेवली । आत्मबोधी विकलवत्क्वचिद्विज्ञानकेवली ॥४३॥
aprabuddho niṣkalaśca kvacitpralayakevalī | ātmabodhī vikalavatkvacidvijñānakevalī
— अप्रबुद्ध ; — निष्कल ; — और ; — कहीं ; — प्रलयकेवली ; — आत्म-बोधी ; — विकल-सा ; — कहीं ; — विज्ञानकेवली

कहीं अप्रबुद्ध और निष्कल होकर वह प्रलयकेवली है; कहीं आत्म-बोधी होते हुए भी विकल-सा होकर विज्ञानकेवली है।