अप्रबुद्धो निष्कलश्च क्वचित्प्रलयकेवली ।
आत्मबोधी विकलवत्क्वचिद्विज्ञानकेवली ॥४३॥
aprabuddho niṣkalaśca kvacitpralayakevalī |
ātmabodhī vikalavatkvacidvijñānakevalī
कहीं अप्रबुद्ध और निष्कल होकर वह प्रलयकेवली है; कहीं आत्म-बोधी होते हुए भी विकल-सा होकर विज्ञानकेवली है।