सैव शाक्तशरीरादिनारकान्तं हि भूतता ।
प्रसूयते स्वचिद्रूपप्रमुखं पार्थिवान्तकम् ॥४०॥
saiva śāktaśarīrādinārakāntaṃ hi bhūtatā |
prasūyate svacidrūpapramukhaṃ pārthivāntakam
— वही; — शाक्त शरीर आदि से लेकर नरक-पर्यन्त; — निश्चय ही; — भूतता (भूत-भाव); — उत्पन्न करती है; — अपने चिद्रूप से आरम्भ करके; — पार्थिव तत्त्व में अन्त वाली
वही (शक्ति) शाक्त शरीर आदि से लेकर नरक-पर्यन्त समस्त भूतता को उत्पन्न करती है — अपने चिद्रूप से आरम्भ करके पार्थिव तत्त्व तक।