The Vision of Śiva· 1.40 / 49

The Vision of Śiva1.40

1.40
सैव शाक्तशरीरादिनारकान्तं हि भूतता । प्रसूयते स्वचिद्रूपप्रमुखं पार्थिवान्तकम् ॥४०॥
saiva śāktaśarīrādinārakāntaṃ hi bhūtatā | prasūyate svacidrūpapramukhaṃ pārthivāntakam
— वही ; — शाक्त शरीर आदि से लेकर नरक-पर्यन्त ; — निश्चय ही ; — भूतता (भूत-भाव) ; — उत्पन्न करती है ; — अपने चिद्रूप से आरम्भ करके ; — पार्थिव तत्त्व में अन्त वाली

वही (शक्ति) शाक्त शरीर आदि से लेकर नरक-पर्यन्त समस्त भूतता को उत्पन्न करती है — अपने चिद्रूप से आरम्भ करके पार्थिव तत्त्व तक।